सरार्फा व्यवसायी योगेश चौधरी रोज की तरह घर से शोरूम के लिए निकले थे। किसी को क्या पता था कि उनके जीवन की यहआखिरी सुबह है। वे जैसे ही अपने प्रतिष्ठान के बाहर एक्टिवा पार्क कर रहे थे, तभी शोरूम में लूटपाट कर रहे नकाबपोश बदमाश बाहर भागे। अंदर मौजूद एक महिला कर्मचारी ने शोर मचाया, आवाज सुनते ही योगेश चौधरी सब समझ गए और बदमाशों को पकड़ने की कोशिश की। लेकिन बहादुरी की यह कोशिश उन्हें भारी पड़ गई। अपराधियों ने उन पर गोली चला दी। अगर वे मात्र दो मिनट देरी से घर से निकलते, तो शायद आज जीवित होते। यह घटना न सिर्फ चौधरी परिवार के लिए, बल्कि पूरे शहर के लिए गहरा झटका है। सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि लूट हुई, बल्कि यह भी है कि सुरक्षा व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों है कि दिनदहाड़े किसी की जान ले ली जाती है?
