जनप्रतिनिधि समाज में उदाहरण प्रस्तुत करते हैं जिसका अनुशरण उनके समर्थक और अनुयायी भी करते हैं लेकिन बीच सड़क पर दो वरिष्ठ नेता ही लड़ जाएं तो आम जनता के जेहन में उस दल और उन नेताओं की क्या छवि होगी और नेता भी उस दल के जो पार्टी विद द डिफरेंस का नारा देती आ रही हो, जी हां हम बात कर रहे हैं भाजपा और उसके उन दो माननीयों की, जो जनता के बीच एक ऐसे कार्यक्रम में हाथापाई करते नजर आए जहां लोग सिर्फ और सिर्फ ईश्वर को याद कर पुण्यात्मा की सदगति की प्रार्थना करते हैं।
